धारा 34  सोसायटियों के विघटन और उनके कार्यकलापों के समायोजन के लिये उपबन्ध-

(1)     किसी भी सोसायटी के उतने सदस्य, जो उसके सदस्यों के तीन-पंचमांश से कम न हों, यह अवधारित कर सकेंगे कि उसका विघटन कर दिया जाये और तदुपरि वह तत्काल या उस समय, जबकि सहमति हो जाये, विघटित कर दी जायेगी तथा सोसायटी की सम्पत्ति उसके दावों एवं दायित्वों के निपटारे तथा परिनिर्धारण के लिये उक्त सोसायटी को लागू होने वाले उसके विनियमों, यदि कोई हो के अनुसार और यदि विनियम न हों तो जैसा कि शासी निकाय समीचीन समझे, समस्त आवश्यक कार्यवाही की जायेगीः

परन्तु सोसायटी के उक्त शासी निकाय या सदस्यों के बीच कोई विवाद उत्पन्न होने की दशा में, उसके कार्यकलापों का समायोजन, उस जिले के, जिसमें सोसायटी का मुख्य भवन स्थित हो आरम्भिक सिविल अधिकारिता वाले प्रधान न्यायालय को निर्देशित किया जायेगा, और न्यायालय उस मामले में ऐसा आदेश करेगा जो कि वह उचिव समझेः

परन्तु यह और भी कि, कोई भी सोसायटी तब तक विघटित नहीं की जायेगी, जब तक कि इस प्रयोजन के लिए बुलाये गये साधारण सम्मेलन में उसके सदस्यों के तीन पंचमांश सदस्यों ने स्वयं या परोक्षी द्वारा मत देकर ऐसे विघटन के लिए इच्छा अभिव्यक्त न कर दी होः

परन्तु यह भी कि जब कभी सरकार, किसी सोसायटी का सदस्य हो या उसका अंशदाता हो या उसमें अन्यथा हितबद्ध हो, तो ऐसी सोसायटी सरकार की सम्मति के बिना विघटित नहीं की जायेगी।

(2)      यदि रजिस्ट्रार की, उसे जानकारी प्राप्त होने पर या अन्यथा, यह राय हो कि कोई सोसायटी निष्क्रिय हो गयी है, या इस अधिनियम या उसके अधीन बनाये गये विनियमों या उपविधियों के उपबन्धों का पालन करने में बार-बार व्यतिक्रम करती रही है तो वह (रजिस्ट्रार) सोसायटी पर सूचना की तामील करके, सूचना में विनिर्दिष्ट की गई कालावधि, जो तीस दिन से कम नहीं होगी, भीतर, शासी निकाय से यह कारण दर्शाने की अपेक्षा कर सकेगा कि क्यों न सोसायटी का रजिस्ट्रीकरण रद्द कर दिया जावे।

(3)     रजिस्ट्रार, प्राप्त हुये उत्तर, यदि कोई हो, पर विचार करने के पश्चात् सूचना की कालावधि का अवसान हो जाने के पश्चात् उसका यह समाधान हो जाने पर की सोसायटी के चालू रहने में किसी उपयोगी प्रयोजन की पूर्ति होना संभाव्य नहीं है, तो वह, लिखित आदेश द्वारा आदेश में विनिर्दिष्ट की गयी तारीख से उस सोसायटी का रजिस्ट्रीकरण रद्द कर सकेगा, और उस आधार पर सोसायटी इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिये विघटित हुई समझी जायेगी।